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बुंदेलखंड के बारे में

बुंदेलखंड का इतिहास

बुंदेलों का पूर्वज पंचम बुंदेला था। बुंदेलखंड बुंदेल राजपूतों के नाम पर प्रसिद्ध है जिनके राज्य की स्थापना 14वीं शती में हुई थी। इससे पूर्व यह प्रदेश जुझौती अथवा जेजाकभुक्ति नाम से जाना जाता था और चन्देलों द्वारा नवीं से चौदहवीं शताब्दी तक शासित होता रहा। राज्य के प्रमुख नगर थे-

बुन्देलखण्ड पिछड़ा और गरीब है !

  • वाल्मीकि, वेदव्यास, भवभूति, मित्र मिश्र, जगनिक, गोस्वामी तुलसीदास, आचार्य केशवदास, बिहारी, भूषण, पधाकर, चन्द्रसखी, ईसुरी, राय प्रवीण, सुभद्राकुमारी चौहान, सेठ गोविन्ददास और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, घासीराम व्यास, डा. वृन्दावनलाल वर्मा जैसे शतश: साहित्य-देवताओं को जन्म देकर भी।
                                                                                                                                                                     
    बुन्देलखण्ड पिछड़ा और गरीब है।

  • रणबाँकुरे आल्हा-ऊदल, बिराटा की पधिनी, प्रतापी वीरसिंह देव, यशस्वी छत्रसाल, त्यागवीर हरदौल, रणचन्डी दुर्गावती, रेहली के विद्रोही बुन्देला, स्वातन्त्रय ज्योति रानी लक्ष्मीबार्इ रामगढ़ की रानी, विश्व विख्यात क्रानितदूत पं0 परमानन्द, चन्द्रशेखर आजाद, महौर और मल्कापुरकर जैसे सहस्त्रों शौर्य-नक्षत्रों को उत्पन्न करके भी ...
                                                                                                                                                                      बुन्देलखण्ड पिछड़ा और गरीब है।

बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के लाभ

आइये हम सभी इस महान प्रयास का हिस्सा बने और बुन्देलखण्ड राज्य के गठन की शपथ लें -

बुन्देलखण्ड निर्माण के बाद वे सभी सुविधायें जो अभी तक बहुत दूर रही है और जिनसे बुन्देलखण्ड की सीमा अभी तक अछूती रही है। वे अब छोटे शहरों एवं कस्बों की पहुंच के अन्दर होंगी। इन सुविधाओं में केन्द्रीय बजट में राज्य को मिलने वाले पैकेज हैं। आईआईटी, आईआईएम, चिकित्सा तकनीकी और उच्च शिक्षा केन्द्र, मंत्रियों के सचिवालय, जनसेवा आयोग, निदेशालय, शिक्षा निदेशालय, उच्च न्यायालय, वाणिज्य कर, श्रम न्यायालय एवंं अन्य प्रशासनिक विभागों के कार्यालय भी शामिल है। ये सभी सीधे तौर से इस क्षेत्र के लोगों को लाभानिवत करेंगे।
 
बुंदेलखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व इस क्षेत्र के एक सर्वांगीण विकास में परिणाम होगा जो अपने ही लोगों के हाथों में होगा। इस क्षेत्र का विकास और यहां के लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए, बुंदेलखंड राज्य के गठन के लिए करना चाहिए।
 
कुछ बड़े लाभ
 
• राज्य सरकार की स्टैम्प डयूटी, रजिस्ट्री आदि के रूप में दिया जाने वाला राजस्व जोकि करोड़़ों में होता है, हमें ही प्राप्त होगा और उसका उपयोग बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विकास में होगा।