नये बुन्देलखण्ड में आरक्षण प्रोन्नति, योग्यता और पिछड़ापन जाति नहीं

बुन्देलखण्ड एकीकरण समिति ने हमीरपुर के पूर्व लोक सभा सांसद श्री गंगाचरण राजपूत के बुन्देलखण्ड प्रान्त निर्माण के लिए संकल्प का स्वागत किया था और कहा था कि अच्छा हो कि वे आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपने प्रमुख कार्य क्षेत्र हमीरपुर-महोबा से ही प्रारम्भ करें तो सफलता शीघ्र मिलेगी।
26 अगस्त के समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ कि श्री राजपूत पिछड़ों के लिए आरक्षण की मांग तो कर रहे हैं पर यह भी कह रहे हैं कि आरक्षण के कारण 15-20 प्रतिशत ऊँची जातियां ही हैं जो 80 प्रतिशत पिछड़े और दलित समूहों के अधिकार छीन रही है।
हमें पूछना है कि नये प्रस्तावित बुन्देलखण्ड में क्या ठाकुर - वैश्य - खत्री - कायस्थ - ब्राह्राण का अधिकार कम होंगे ? क्या हरिजन-पिछड़ों के अतिरिक्त सभी जातियों के अधिकांश लोग गरीब व पिछड़े, बेरोजगार नहीं है। क्या यादव - जाट - लोधी - कुर्मी - कुशवाहा जातियों में पिछड़ापन है। क्या पूर्व मुख्यमंत्री श्री कल्याण सिंह, स्वयं श्री गंगाचरण राजपूत पिछड़े व गरीब हैं।
बुन्देलखण्ड एकीकरण समिति में अहिरवार - कुशवाहा - यादव - वैश्य - कायस्थ - मुसलमान - ब्राह्राण - ठाकुर - बरार सभी प्रभारी हैं और सभी को सारे अधिकार समान हैं। यहीं हम आगे भी रखेंगे - जनता के समर्थन से प्राप्त कानून की नजर में सारी जनता के हर व्यकित का अधिकार समान होगा। किसी को न कम न ज्यादा।
             मेहनत - योग्यता ही एक मात्र आधार है समाज संतुलित रखने का।
 
 
   - डा0 पं0 विश्वनाथ शर्मा