बन्द के आह्वान से नहीं समस्याओं को हल करने से होगा बुन्देलखण्ड का विकास

15.03.2015 को पृथक बुन्देलखण्ड की मांग को लेकर लड़ रहे एक दल द्वारा बुन्देलखण्ड बन्द का आवाहन किया गया है। यह उचित नहीं है। बन्द का आम जनजीवन पर प्रभाव पड़ता है लोगों के दैनिक कार्य बन्द हो जाते हैं बच्चे स्कूल नहीं जा पाते नौकरी पेशा लोग अपने काम पर नहीं जा पाते मरीज इलाज से वंचित रह जाते है कई तो वाहन न मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं दुकानेें बन्द हो जाती हैं देश व आम जन को आर्थिक हानि से गुजरना पड़ता है। इस तरह के आन्दोलन कभी कभी बेलगाम होकर हिंसात्मक रूप ले लेते है जिससे सरकारी व निजी सम्पत्तियों का नुकसान होता है तथा लोगों के जानोमाल की भी हानि होती है। आम नागरिक को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतः यह समस्या का हल न होकर लोगों की समस्याओं को बढ़ाना होता हैै।
    मेरी उन सभी से जो पृथक बुन्देलखण्ड प्रान्त निर्माण की इच्छा रखते है तथा आन्दोलन से जुड़े है अपील है वे बुन्देलखण्ड वासियों की समस्याओं से जुड़ कर उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करें तभी हम बुन्देलखण्ड वासी एकाकार होकर आन्दोलन को आगे बढ़ा पायेंगे। हम भी बुन्देलखण्ड एकीकरण समिति के माध्यम से पृथक बुन्देलखण्ड प्रान्त की मांग को लेकर चल रहे आन्दोलन को हिंसात्मक रूप न देकर बुन्देली जन के विकास को एकरूप देने का प्रयास रहे हैं। हमने पृथक बुन्देलखण्ड प्रान्त निर्माण के लिए सन् 1970 में बुन्देलखण्ड एकीकरण समिति का गठन किया था और लोगों के बीच रह कर कार्य किया इससे प्रभावित होकर लोग भारी संख्या बल में हमसे जुड़कर समर्थन दे रहे हैं। 
    अतः मेरी समस्त बुन्देलखण्ड वासियों से पुनः अपील है कि वे बुन्देलखण्ड बन्द आन्दोलन से न जुड़ कर अहिंसात्मक तरीके से अपनी आवाज को मुखर करें क्योंकि बन्द, रेल रोको तथा अन्य हिंसा की ओर ले जाने वाले आन्दोलन इस समस्या का हल नहीं हैं।