यह प्रयास करके तो देखो...

देश की सबसे बड़ी विद्यार्थी संस्था (विद्यार्थी परिषद) ने 800 बच्चों को झांसी में पुरूस्कृत किया है। अच्छी बात है। पर ये इतनी बड़ी संस्था है कि इनके लिए 8 लाख भी कम है। मैं अकेला प्राणी 14000 को बांट चुका हूँ।
    आर0एल0पी0एस0 न्यास सर्वप्रथम देश के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय के शिक्षक अर्थात सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की जिम्मेदारी है। इन्ही शिक्षकों के पढ़ाये बच्चे भारतीय संस्कृति में पूर्ण रूप से घुले अंग्रेजी मिशन वाले स्कूलों सेे बहुत आगे हैं। एक बड़ा अन्तर है। मैं परीक्षा लेकर कम्प्यूटरों के माध्यम से परीक्षा-फल तय करता हूँ।
    पहले हमने भी कई बार बोर्ड परीक्षाफलों पर ही पुरूस्कृत किया यह आसान जरूर है पर इसमें नकल आदि की गुंजाइश रहती है। आज कल कोचिंग से भी अच्छे परीक्षाफल आसान हो गये हैं। इस वर्ष तो I.C.S.E., C.B.S.E. व Boards के परीक्षाफल अप्रत्याशित रूप से आसान हुए हैं।
    हम वोर्ड के बजाय 6-7-8 कक्षाओं में परीक्षा लेते है। इसमें लाभ यह है कि प्रश्न पत्र हमारा और कम्प्यूटर से प्रश्न पत्र व परीक्षा फल तय होता है। छोटे बच्चों में तुलनात्मक ईमानदारी ज्यादा होती है और वे प्रोत्साहित भी ज्यादा होते हैं। हम नगद राशि भी देते है और दो पुस्तके भी देते हैं। एक है हमारे प्रेरक-रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल के प्रेरक धरतीपुत्र पद्म भूषण दद्दा ध्यानचंद, पद्म भूषण बाबू वृन्दावनलाल वर्मा उपन्यास सम्राट और पद्म भूषण दद्दा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त एवं राजा मर्दन सिंह चंदेरी-बानपुर के राजा जिनके पिता ने रानी से भी पहले विद्रोह की चिंगारी दी थी। एैतिहासिक अति महान व्यक्तियों से बच्चा तालमेल नहीं बैठा पाता। प्रेरकों की संताने अभी हैं। दूसरी पुस्तक हमारे पूर्वज। इसमें भारत के 19 मूर्धन्य ऋषियों एवं 9 ऋषिकाओं (मदालसा, सावित्री, कौशल्या आदि) (अ गिरा-वशिष्ठ आदि) राशि बांटते समय अभिवावकों को भी बुलाया जाता है और सब को यथेष्ट मात्रा में स्वल्पाहार दिया जाता है। प्रश्न पत्र निर्माण-परीक्षा की व्यवस्था व्यय- परीक्षाफल निर्माण व्यय-वितरण व्यय कुल मिलाकर प्रोत्साहन राशि के बराबर ही खर्च हो जाता है। प्रमाण पत्र तो देते ही हैं।
    प्रणाली कोई सही- लाभदायक है। विद्यार्थी परिषद को बधाई।
    एक बड़ा सुझाव है। कई लाख सदस्यों की परिषद यदि 10 रूपये प्रतिमाह सदस्यों से ले तो करोड़ों रूपयों का फन्ड बन जाय-2-3 वर्षों में ही ब्याज से ही यह पुरूस्कार दे सकते हैं- मेरे विचार से तो उच्च एवं अति उच्च शिक्षा विदेश जाकर पढ़ाई इत्यादि कार्य भी आसान हो जायगे।