सब तो कप्तान हैं आखिर सिपाही कौन है नेता ज्यादा-कार्यकर्ता नहीं

ब्राह्राण एकता का नारा लगाने वाले स्वयं ब्राह्राण व जग भलार्इ के कार्य करें जिससे आम ब्राह्राण को उनकी बात मानने और जनता को गर्व से बताने का अवसर मिले। सार्वजनिक शä सिर्वजन से मिलती है - केवल एक बिरादरी से नहीं। पं0 नेहरू, पं0 गोविन्दवल्लभ पंत (पहले मुख्यमंत्री - उ0प्र0), कैलाश जोशी (मुख्यमंत्री - उ0प्र0), कमलापति त्रिपाठी (मुख्यमंत्री - उ0प्र0), मुख्यमंत्री  पं0 हेमवतीनंदन बहुगुणा, रविशंकर शुक्ला (मुख्यमंत्री - म0प्र0), डी0पी0मिश्रा (मुख्यमंत्री - म0प्र0), श्यामाचरण शुक्ला (मुख्यमंत्री - म0प्र0), लोकनायक व्यास (मुख्यमंत्री - राजस्थान), हरिदेव जोशी (मुख्यमंत्री - राजस्थान), डा0 भगवत दयाल शर्मा (मुख्यमंत्री - हरियाणा), गुनडू राव (मुख्यमंत्री - आन्ध्रप्रदेश), विनोवानन्द झां (मुख्यमंत्री - बिहार), पं0 गोपीचंद भार्गव (हिमाचल हरियाणा मिलाकर पंजाब), एन श्री रामचन्द्रन (मुख्यमंत्री - तमिलनाडू), अजय मुखर्जी (मुख्यमंत्री - बंगाल) - केवल ब्राह्राण नेता नहीं थे - बलिक सर्वजन के थे इसलिए ब्राह्राणों को भी गर्व होता था। ऐसे ही समर्थ - कार्यशील-त्यागी ब्राह्राणों को उत्साहित कीजिये - समाज का तत्काल भला होेगा - संगठन भी बनेगा - बाकी देश भी साथ आयेगा।  
 
डा0 पं0 विश्वनाथ शर्मा (डी.लिट)
पूर्व-सांसद (लोकसभा)